बालकाण्ड · दोहा 324 · दोहा
जय धुनि बंदी बेद धुनि मंगल गान निसान।
जय धुनि बंदी बेद धुनि मंगल गान निसान।
सुनि हरषहिं बरषहिं बिबुध सुरतरु सुमन सुजान॥ ३२४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.324 · पुस्तक पृ. 305, 306
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जय धुनि बंदी बेद धुनि मंगल गान निसान।
बंदीजनों के जयघोष, वेद-पाठ की ध्वनि, मंगलगीत और नगाड़ों की आवाज गूँज रही है।
English explanation
The heralds’ acclamations, Vedic chanting, auspicious songs, and kettledrums resound.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जयघोष की | of acclamation |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| बंदी | स्तुति करने वाले बंदीजन | heralds and praise-singers |
| बेद | वेद-पाठ की | of Vedic recitation |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| मंगल | मंगलकारी | auspicious |
| गान | गीत | songs |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
2सुनि हरषहिं बरषहिं बिबुध सुरतरु सुमन सुजान॥ ३२४॥
इन्हें सुनकर सुजान देवता हर्षित होते हैं और कल्पवृक्ष के फूल बरसाते हैं।
English explanation
Hearing these sounds, the discerning gods rejoice and shower flowers from the celestial wish-fulfilling tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| हरषहिं | हर्षित होते हैं | rejoice |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| बिबुध | देवता | the gods |
| सुरतरु | कल्पवृक्ष के | of the celestial wish-fulfilling tree |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुजान | सुजान | discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 324
- स्रोत अभिलेख
- 1.324
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 305, 306
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