बालकाण्ड · दोहा 325 · दोहा
मुदित अवधपति सकल सुत बधुन्ह समेत निहारि।
मुदित अवधपति सकल सुत बधुन्ह समेत निहारि।
जनु पाए महिपाल मनि क्रियन्ह सहित फल चारि॥ ३२५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.325 · पुस्तक पृ. 307, 308
भावार्थ और शब्दार्थ
1मुदित अवधपति सकल सुत बधुन्ह समेत निहारि।
अवध के राजा दशरथ सभी पुत्रों को उनकी वधुओं सहित देखकर प्रसन्न हुए।
English explanation
Dasharatha, king of Ayodhya, rejoiced to behold all his sons together with their brides.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| अवधपति | अवध के राजा दशरथ | Dasharatha, king of Ayodhya |
| सकल | सभी | all |
| सुत | पुत्रों को | sons |
| बधुन्ह | वधुओं के | their brides |
| समेत | साथ | together with |
| निहारि | देखकर | beholding |
2जनु पाए महिपाल मनि क्रियन्ह सहित फल चारि॥ ३२५॥
मानो राजाओं के शिरोमणि ने उन्हें प्राप्त करने वाली क्रियाओं सहित चारों पुरुषार्थ पा लिए हों।
English explanation
It was as though the jewel among kings had attained all four aims of human life, together with the practices leading to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| पाए | प्राप्त किए | attained |
| महिपाल | राजाओं में | among kings |
| मनि | शिरोमणि | the jewel |
| क्रियन्ह | साधक क्रियाओं के | the practices leading to them |
| सहित | साथ | together with |
| फल | पुरुषार्थरूपी फल | goals of human life |
| चारि | चार | four |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 325
- स्रोत अभिलेख
- 1.325
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 307, 308
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।