बालकाण्ड · दोहा 90 · दोहा/सोरठा
हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।
हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।
चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास।।90।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 104, 105
भावार्थ और शब्दार्थ
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1हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।
पार्वती के वचन सुनकर और उनका प्रेम तथा विश्वास देखकर मुनि हृदय में प्रसन्न हुए।
English explanation
Hearing Parvati’s words and seeing her love and faith, the sages rejoiced in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| मुनि | मुनि | the sages |
| बचन | पार्वती के वचन | Parvati’s words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| देखि | देखकर | having seen |
| प्रीति | प्रेम | love |
| बिस्वास | विश्वास | faith |
2 चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास।।90।।
भवानी को सिर झुकाकर प्रणाम करके मुनि चले और हिमाचल के पास गए।
English explanation
Bowing their heads to Bhavani, the sages departed and went to Himachal, her father.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | departed |
| भवानिहि | पार्वती को | to Parvati |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सिर | सिर | their heads |
| गए | गए | went |
| हिमाचल | पार्वती के पिता हिमाचल | Himachal, Parvati’s father |
| पास | के पास | to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 90
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- सहायक विषय
- देवताओंका शिवजीसे ब्याहके लिये प्रार्थना करना, सप्तर्षियोंका पार्वतीके पास जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 104, 105
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