बालकाण्ड · दोहा 223 · दोहा/सोरठा
हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।
हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।
जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.223 · पुस्तक पृ. 219, 220
भावार्थ और शब्दार्थ
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1हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।
सुंदर मुख और सुंदर नेत्रों वाली स्त्रियों के समूह हृदय में हर्षित होते हैं और फूल बरसाते हैं।
English explanation
Groups of women with lovely faces and beautiful eyes rejoice inwardly and shower flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषहिं | हर्षित होती हैं | rejoice |
| बरषहिं | बरसाती हैं | shower |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुमुखि | सुंदर मुख वाली स्त्रियाँ | lovely-faced women |
| सुलोचनि | सुंदर नेत्रों वाली स्त्रियाँ | beautiful-eyed women |
| बृंद | समूह | groups |
2 जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।
दोनों भाई राम और लक्ष्मण जहाँ-जहाँ जाते हैं, वहाँ-वहाँ परम आनंद छा जाता है।
English explanation
Wherever the two brothers, Rama and Lakshmana, go, supreme joy prevails.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाहिं | जाते हैं | go |
| जहाँ | जहाँ | wherever |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| बंधु | भाई; राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| दोउ | दोनों | both |
| तहँ | वहाँ | there |
| तहँ | वहाँ | there |
| परमानंद | परम आनंद | supreme joy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 223
- स्रोत अभिलेख
- 1.223
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 219, 220
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