बालकाण्ड · दोहा 224 · दोहा/सोरठा
सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।
सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।
तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात।।224।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.224 · पुस्तक पृ. 220, 221
भावार्थ और शब्दार्थ
1सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।
सभी बालक इसी बहाने, प्रेम के वश होकर, प्रभु के मनोहर शरीर को छूते थे।
English explanation
Using this as a pretext, all the children, moved by love, touched the Lord’s lovely body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| सिसु | बालक | children |
| एहि | इसी | this very |
| मिस | बहाने से | as a pretext |
| प्रेमबस | प्रेम के वश होकर | moved by love |
| परसि | छूकर | having touched |
| मनोहर | मन को मोहने वाला | lovely |
| गात | शरीर | body |
2 तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात।।224।।
दोनों भाइयों को बार-बार देखकर बालकों के शरीर रोमांचित होते और उनके हृदय में अत्यंत हर्ष होता।
English explanation
As the children gazed repeatedly at the two brothers, their bodies thrilled with goosebumps and their hearts were filled with great joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तन | शरीर | bodies |
| पुलकहिं | रोमांचित होते हैं | thrill with goosebumps |
| अति | अत्यंत | great |
| हरषु | हर्ष | joy |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| देखि | देखकर | seeing |
| देखि | बार-बार देखकर | gazing repeatedly |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्रात | भाई—राम और लक्ष्मण | brothers—Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 224
- स्रोत अभिलेख
- 1.224
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 220, 221
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।