बालकाण्ड · दोहा 225 · दोहा/सोरठा
सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।
सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।
गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ।।225।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.225 · पुस्तक पृ. 221, 222
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।
दोनों भाई भय और प्रेम से युक्त, अत्यंत विनम्र और संकोच सहित—
English explanation
Both brothers, filled with apprehension and love, exceedingly humble and diffident—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सभय | भय सहित | with apprehension |
| सप्रेम | प्रेम सहित | with love |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सकुच | संकोच | diffidence |
| सहित | सहित | with |
| दोउ | दोनों | both |
| भाइ | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
2 गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ।।225।।
गुरु के चरण-कमलों में सिर झुकाकर और उनकी अनुमति पाकर बैठ गए।
English explanation
Bowed their heads at their teacher's lotus feet and sat down after receiving his permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु विश्वामित्र के | of their teacher Vishvamitra |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सिर | सिर | their heads |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| आयसु | आज्ञा; अनुमति | permission |
| पाइ | पाकर | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 225
- स्रोत अभिलेख
- 1.225
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 221, 222
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