बालकाण्ड · दोहा 178 (ख) · दोहा/सोरठा
हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।
हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।
सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ।।178(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.178 · पुस्तक पृ. 179, 179
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।
हरि की प्रेरणा से जिस कल्प में जो भी राक्षसों का राजा होता है—
English explanation
Whoever becomes king of the demons in any cosmic age through Hari's prompting—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिप्रेरित | हरि की प्रेरणा से | prompted by Hari, Vishnu |
| जेहिं | जिस में | in whichever |
| कलप | कल्प, ब्रह्मांडीय काल | cosmic age |
| जोइ | जो भी | whoever |
| जातुधानपति | राक्षसों का राजा | king of the demons |
| होइ | होता है | becomes |
2 सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ।।178(ख)।।
वही वीर, प्रतापी और अतुल बल वाला राजा अपनी सेना सहित वहाँ रहता है।
English explanation
That same valiant, mighty king of incomparable strength dwells there with his army.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सूर | वीर | valiant |
| प्रतापी | प्रतापशाली | mighty; commanding |
| अतुलबल | अतुलनीय बल वाला | of incomparable strength |
| दल | सेना | army |
| समेत | सहित | together with |
| बस | वहाँ रहता है | dwells there |
| सोइ | वही राजा | that very king |
| ख | दोहा-खंड का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | reference marker for verse section ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 178 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.178
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 179, 179
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