बालकाण्ड · दोहा 179 · दोहा/सोरठा
कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।
कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।
मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.179 · पुस्तक पृ. 180, 180
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।
फिर उसने केवल खेल-खेल में जाकर कैलास पर्वत उठा लिया।
English explanation
Then, merely for sport, he went and lifted Mount Kailasa.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुकहीं | केवल खेल-खेल में | merely for sport |
| कैलास | कैलास पर्वत | Mount Kailasa |
| पुनि | फिर | then |
| लीन्हेसि | उसने ले लिया | he took |
| जाइ | जाकर | having gone |
| उठाइ | उठाकर | lifting |
2 मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।
मानो अपने बाहुबल को तौलकर वह बहुत प्रसन्न होकर चल पड़ा।
English explanation
As though he had measured the strength of his own arms, he departed in great delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| तौलि | तौलकर | having measured |
| निज | अपना | his own |
| बाहुबल | भुजाओं का बल | strength of his arms |
| चला | चल पड़ा | departed |
| बहुत | बहुत | great |
| सुख | सुख | delight |
| पाइ | पाकर | having experienced |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 179
- स्रोत अभिलेख
- 1.179
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 180, 180
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