बालकाण्ड · दोहा 180 · दोहा/सोरठा
कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।
कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।
एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।180।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.18 · पुस्तक पृ. 180, 181
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।
कुमुख, अकंपन, कुलिसरद, धूमकेतु और अतिकाय—
English explanation
Kumukha, Akampana, Kulisarada, Dhumaketu, and Atikaya—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुमुख | कुमुख नामक राक्षस योद्धा | Kumukha, a demon warrior |
| अकंपन | अकंपन नामक राक्षस योद्धा | Akampana, a demon warrior |
| कुलिसरद | कुलिसरद नामक राक्षस योद्धा | Kulisarada, a demon warrior |
| धूमकेतु | धूमकेतु नामक राक्षस योद्धा | Dhumaketu, a demon warrior |
| अतिकाय | अतिकाय नामक विशालकाय राक्षस योद्धा | Atikaya, a huge-bodied demon warrior |
2 एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।180।।
ऐसे श्रेष्ठ योद्धाओं के समूह थे, जिनमें प्रत्येक अकेला ही संसार को जीत सकता था।
English explanation
There were hosts of such mighty warriors, each of whom could conquer the world single-handedly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | each |
| एक | अकेला | one individually |
| जग | संसार को | the world |
| जीति | जीत | conquer |
| सक | सकता था | could |
| ऐसे | इस प्रकार के | such |
| सुभट | श्रेष्ठ योद्धा | mighty warriors |
| निकाय | समूह | hosts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 180
- स्रोत अभिलेख
- 1.18
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 180, 181
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