बालकाण्ड · दोहा 297 · दोहा/सोरठा
सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।
सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।
जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.297 · पुस्तक पृ. 281, 281
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।
दशरथ के महल की शोभा का कौन कवि पूर्ण वर्णन कर सकता है?
English explanation
What poet could fully describe the splendor of Dasharatha’s palace?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभा | शोभा | splendor |
| दसरथ | अयोध्या के राजा दशरथ का | of Dasharatha, king of Ayodhya |
| भवन | महल | palace |
| कइ | की | of |
| को | कौन | which; what |
| कबि | कवि | poet |
| बरनै | वर्णन कर सके | could describe |
| पार | पूर्णतः; अंत तक | fully; to the very end |
2 जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।
जहाँ समस्त देवताओं के शिरोमणि राम ने अवतार लिया।
English explanation
There Rama, the crown jewel of all the gods, took birth as an incarnation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहाँ | जहाँ | where |
| सकल | समस्त | all |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| सीस | मस्तक का; शिरोमणि में ‘शिर’ | head; crown |
| मनि | मणि; श्रेष्ठ रत्न | jewel; foremost gem |
| राम | दशरथ-पुत्र राम | Rama, Dasharatha’s son |
| लीन्ह | लिया | took |
| अवतार | अवतार; जन्म | incarnation; birth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 297
- स्रोत अभिलेख
- 1.297
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 281, 281
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