बालकाण्ड · दोहा 296 · दोहा/सोरठा
मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।
मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।
बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.296 · पुस्तक पृ. 280, 280
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।
लोगों ने अपने-अपने घरों को सजाकर मंगलमय बनाया।
English explanation
People adorned their respective homes, making them auspicious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगलमय | मंगल से परिपूर्ण | auspicious |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अपने | own; each person’s respective |
| भवन | घर | homes |
| लोगन्ह | लोगों ने | the people |
| रचे | सजाए | adorned |
| बनाइ | तैयार करके | having arranged |
2 बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।
गलियों में चार सुगंधित पदार्थों का मिश्रण छिड़का गया और सुंदर मंगल-चौक बनाए गए।
English explanation
The lanes were sprinkled with a blend of four fragrant substances, and beautiful auspicious floor designs were drawn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीथीं | गलियाँ | lanes |
| सीचीं | सींची गईं, छिड़काव किया गया | were sprinkled |
| चतुरसम | चार सुगंधित द्रव्यों का मिश्रण | a blend of four aromatic substances |
| चौकें | मंगल के भूमि-अलंकरण | auspicious floor designs |
| चारु | सुंदर | beautiful |
| पुराइ | बनाकर, अंकित करके | having drawn or filled in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 296
- स्रोत अभिलेख
- 1.296
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 280, 280
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