बालकाण्ड · दोहा 295 · दोहा/सोरठा
जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।
जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।
चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.295 · पुस्तक पृ. 279, 280
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।
याचकों को बुलवा लिया और उन्हें असंख्य प्रकार के निछावर के उपहार दिए।
English explanation
The supplicants were called in and given countless kinds of celebratory gifts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाचक | याचकों को | the supplicants |
| लिए | बुलवा लिया | had brought in |
| हँकारि | पुकारकर | by calling |
| दीन्हि | दी | gave |
| निछावरि | निछावर के उपहार | gifts offered in celebration |
| कोटि | करोड़ों, अर्थात असंख्य | countless |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
2 चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।
चक्रवर्ती दशरथ के चारों पुत्र चिरंजीवी हों—दीर्घकाल तक जीवित रहें।
English explanation
May all four sons of Emperor Dasharatha live long!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिरु | दीर्घकाल तक | for a long time |
| जीवहुँ | जीवित रहें | may you live |
| सुत | पुत्र | sons |
| चारि | चारों | all four |
| चक्रबर्ति | चक्रवर्ती सम्राट | sovereign emperor |
| दसरत्थ | दशरथ | Dasharatha, king of Ayodhya |
| के | के | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 295
- स्रोत अभिलेख
- 1.295
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 279, 280
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।