बालकाण्ड · दोहा 294 · दोहा/सोरठा
चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।
चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।
भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.294 · पुस्तक पृ. 278, 279
भावार्थ और शब्दार्थ
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1चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।
गुरु का ‘शीघ्र चलिए’ वचन सुनकर, राजा ने सिर झुकाकर कहा—‘अच्छा, हे नाथ।’
English explanation
Hearing the guru’s words, ‘Depart quickly,’ the king bowed his head and replied, ‘Certainly, my lord.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलहु | चलिए | depart |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुर | गुरु के | the guru’s |
| बचन | वचन | words |
| भलेहिं | अच्छा; अवश्य | certainly; very well |
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
2 भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।
तब राजा दूतों के लिए ठहरने का स्थान दिलवाकर महल गए।
English explanation
Then the king went to the palace after arranging lodging for the messengers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| गवने | गए | went |
| भवन | महल | to the palace |
| तब | तब | then |
| दूतन्ह | दूतों को | for the messengers |
| बासु | ठहरने का स्थान | lodging |
| देवाइ | दिलवाकर | having arranged |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 294
- स्रोत अभिलेख
- 1.294
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 278, 279
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