बालकाण्ड · दोहा 293 · दोहा/सोरठा
तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।
तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।
कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.293 · पुस्तक पृ. 278, 278
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।
तब राजा उठकर वसिष्ठ के पास गए और उन्हें पत्रिका दी।
English explanation
Then the king rose, went to Vasishtha, and gave him the letter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| उठि | उठकर | having risen |
| भूप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बसिष्ठ | गुरु वसिष्ठ | Vasishtha, the royal preceptor |
| कहुँ | को | to |
| दीन्हि | दी | gave |
| पत्रिका | पत्र; जनक की भेजी पत्रिका | the letter sent by Janaka |
| जाइ | जाकर | having gone |
2 कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।
दूतों को आदरपूर्वक बुलाकर गुरु को सारी कथा सुनाई।
English explanation
Having respectfully summoned the messengers, he had the whole account recounted to his preceptor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कथा | घटनाओं का वृत्तांत | account of events |
| सुनाई | सुनाई; सुनवाया | recounted; had recounted |
| गुरहि | गुरु को | to the preceptor |
| सब | सारी | the whole |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| दूत | दूतों को | the messengers |
| बोलाइ | बुलाकर | having summoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 293
- स्रोत अभिलेख
- 1.293
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 278, 278
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