बालकाण्ड · दोहा 292 · दोहा/सोरठा
तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।
तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।
भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.292 · पुस्तक पृ. 277, 277
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।
हे महान राजा, सुनिए: वहाँ रघुवंश के रत्न राम ने—
English explanation
Listen, great king: there Rama, the jewel of Raghu’s lineage—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहाँ | वहाँ | there |
| राम | राम ने | Rama |
| रघुबंस | रघु के वंश के | of Raghu’s lineage |
| मनि | रत्न; श्रेष्ठ पुरुष | jewel; foremost scion |
| सुनिअ | सुनिए | listen |
| महा | महान | great |
| महिपाल | हे राजा | O king |
2 भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।
धनुष को बिना प्रयास तोड़ दिया, जैसे हाथी कमल की डंडी तोड़ देता है।
English explanation
—broke the bow effortlessly, as an elephant breaks a lotus stalk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भंजेउ | तोड़ दिया | broke |
| चाप | धनुष | the bow |
| प्रयास | प्रयत्न | effort |
| बिनु | बिना | without |
| जिमि | जैसे | as |
| गज | हाथी | an elephant |
| पंकज | कमल की | of a lotus |
| नाल | डंडी | stalk |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 292
- स्रोत अभिलेख
- 1.292
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 277, 277
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