बालकाण्ड · दोहा 291 · दोहा/सोरठा
सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।
सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।
रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.291 · पुस्तक पृ. 276, 277
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।
हे राजाओं के मुकुटमणि, सुनिए: आपके समान धन्य कोई नहीं है।
English explanation
Listen, O crown jewel among kings: no one is as blessed as you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| महीपति | राजाओं के | among kings |
| मुकुट | मुकुट का | of the crown |
| मनि | रत्न | jewel |
| तुम्ह | आपके | you |
| सम | समान | as |
| धन्य | धन्य, सौभाग्यशाली | blessed, fortunate |
| न | नहीं | not |
| कोउ | कोई | anyone |
2 रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।
जिनके पुत्र राम और लक्ष्मण हैं—दोनों ही संसार के आभूषण हैं।
English explanation
For Rama and Lakshmana are your sons, both ornaments of the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Dasharatha’s son |
| जिन्ह | जिनके—आपके | whose—your |
| के | के | of |
| तनय | पुत्र हैं | are sons |
| बिस्व | संसार के | of the world |
| बिभूषन | आभूषण | ornaments |
| दोउ | दोनों | both |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 291
- स्रोत अभिलेख
- 1.291
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 276, 277
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