बालकाण्ड · दोहा 290 · दोहा/सोरठा
कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।
कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।
सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 275, 276
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।
‘प्राणों से प्रिय दोनों भाई कुशल तो हैं? बताइए, वे किस देश में हैं?’
English explanation
‘Are both my brothers, dear as life itself, well? Tell me, in which land are they?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुसल | कुशल, सकुशल | well, safe |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | dear as life itself |
| बंधु | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
| दोउ | दोनों | both |
| अहहिं | हैं | are |
| कहहु | बताइए | please tell me |
| केहिं | किस | which |
| देस | देश में | in what land |
2 सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।
प्रेम में सने ये वचन सुनकर राजा ने पत्र फिर पढ़ा।
English explanation
Hearing these words steeped in affection, the king read the letter again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सनेह | प्रेम में | in affection |
| साने | सने हुए | steeped |
| बचन | वचन | words |
| बाची | पत्र पढ़ा | read the letter |
| बहुरि | फिर | again |
| नरेस | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 290
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 275, 276
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।