बालकाण्ड · दोहा 289 · दोहा/सोरठा
बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।
बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।
तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.289 · पुस्तक पृ. 274, 275
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।
जिस नगर में लक्ष्मी सुंदर स्त्री का छद्म वेश धारण करके रहती हैं—
English explanation
In the city where Lakshmi dwells disguised in the lovely guise of a woman—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बसइ | रहती हैं | dwells |
| नगर | नगर में | in the city |
| जेहि | जिस | which |
| लच्छ | लक्ष्मी, संपदा की देवी | Lakshmi, goddess of prosperity |
| करि | धारण करके | having assumed |
| कपट | छद्म; पहचान छिपाने वाला | disguised; concealing identity |
| नारि | स्त्री का | of a woman |
| बर | सुंदर; उत्तम | lovely; splendid |
| बेषु | वेश | guise |
2 तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।
उस नगर की शोभा का वर्णन करते हुए सरस्वती और शेष भी संकोच करते हैं।
English explanation
Even Saraswati and Shesha hesitate to describe the splendor of that city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| पुर | नगर | city |
| कै | की | of |
| सोभा | शोभा; भव्यता | splendor |
| कहत | वर्णन करते हुए | while describing |
| सकुचहिं | संकोच करते हैं | hesitate |
| सारद | वाणी और विद्या की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech and learning |
| सेषु | शेष, दिव्य सर्पराज | Shesha, the divine serpent king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 289
- स्रोत अभिलेख
- 1.289
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 274, 275
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