बालकाण्ड · दोहा 288 · दोहा/सोरठा
सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।
सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।
हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.288 · पुस्तक पृ. 274, 274
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।
नीलमणि को तराशकर आम के अत्यंत सुंदर पल्लव बनाए गए थे।
English explanation
Very beautiful mango leaves were fashioned by carving sapphires.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौरभ | आम के | of the mango tree |
| पल्लव | कोमल पत्ते | tender leaves |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सुठि | अत्यंत | very |
| किए | बनाए गए | were made |
| नीलमनि | नीलमणि | sapphire |
| कोरि | तराशकर | by carving |
2 हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।
सोने के बौर और पन्नों के फल-गुच्छे रेशमी डोरी पर शोभित थे।
English explanation
Golden mango blossoms and emerald fruit clusters shone on a silken cord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हेम | सोने के | of gold |
| बौर | आम के बौर | mango blossoms |
| मरकत | पन्नों के | of emeralds |
| घवरि | फलों के गुच्छे | fruit clusters |
| लसत | शोभित हैं | shine |
| पाटमय | रेशम की | silken |
| डोरि | डोरी पर | on a cord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 288
- स्रोत अभिलेख
- 1.288
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 274, 274
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