बालकाण्ड · दोहा 150 · दोहा/सोरठा
सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।
सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।
सोइ बिबेक सोइ रहनि प्रभु हमहि कृपा करि देहु।।150।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.15 · पुस्तक पृ. 156, 157
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।
‘वही सुख, वही गति, वही भक्ति और आपके अपने चरणों में वही प्रेम—’
English explanation
“That same happiness, that same spiritual attainment, that same devotion, and that same love for your own feet—”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that same |
| सुख | सुख | happiness |
| सोइ | वही | that same |
| गति | आध्यात्मिक गति | spiritual attainment |
| सोइ | वही | that same |
| भगति | भक्ति | devotion |
| सोइ | वही | that same |
| निज | आपके अपने | your own |
| चरन | चरणों में | for your feet |
| सनेहु | प्रेम | love |
2 सोइ बिबेक सोइ रहनि प्रभु हमहि कृपा करि देहु।।150।।
‘वही विवेक और वही जीवन-आचरण, हे प्रभु, कृपा करके हमें दीजिए।’
English explanation
“Grant us that same discernment and that same way of life, O Lord, in your grace.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that same |
| बिबेक | विवेक; सही भेद की समझ | discernment |
| सोइ | वही | that same |
| रहनि | रहन-सहन; जीवन-आचरण | way of life; conduct |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| हमहि | हमें | to us |
| कृपा | कृपा | grace; kindness |
| करि | करके | having shown |
| देहु | दीजिए | please grant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 150
- स्रोत अभिलेख
- 1.15
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 156, 157
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।