बालकाण्ड · दोहा 151 · दोहा/सोरठा
तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।
तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।
होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत।।151।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.151 · पुस्तक पृ. 157, 158
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।
हे तात, वहाँ भरपूर सुख-भोग करके, कुछ समय बीतने पर फिर…
English explanation
Dear one, after enjoying abundant pleasures there, when some time has passed, then…
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| करि | करके | having enjoyed |
| भोग | सुख-भोग | pleasures |
| बिसाल | भरपूर | abundant |
| तात | हे तात | dear one |
| गउँ | बीतने पर | having passed |
| कछु | कुछ | some |
| काल | समय | time |
| पुनि | फिर | then again |
2 होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत।।151।।
तुम अवध के राजा होओगे; तब मैं तुम्हारा पुत्र बनूँगा।
English explanation
You will become king of Ayodhya; then I will become your son.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहहु | तुम होओगे | you will become |
| अवध | अवध के | of Ayodhya |
| भुआल | राजा | king |
| तब | तब | then |
| मैं | मैं | I |
| होब | बनूँगा | will become |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| सुत | पुत्र | son |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 151
- स्रोत अभिलेख
- 1.151
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 157, 158
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