बालकाण्ड · दोहा 152 · दोहा/सोरठा
यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।
यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।
भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.152 · पुस्तक पृ. 158, 159
भावार्थ और शब्दार्थ
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1यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।
यह अत्यंत पवित्र वृत्तांत वृषकेतु शिव ने उमा को सुनाया।
English explanation
Shiva, whose banner bears the bull, told Uma this most sacred account.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| इतिहास | वृत्तांत; पुरानी कथा | account; ancient narrative |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| अति | अत्यंत | very; exceedingly |
| उमहि | उमा, पार्वती को | to Uma, Parvati |
| कही | सुनाया | recounted |
| बृषकेतु | वृषभ-ध्वज वाले शिव | Shiva, whose banner bears a bull |
2 भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।
हे भरद्वाज, अब राम के जन्म का एक और कारण सुनो।
English explanation
Bharadwaja, now hear another reason for Rama's birth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरद्वाज | हे ऋषि भरद्वाज | O sage Bharadwaja |
| सुनु | सुनो | listen |
| अपर | दूसरा; एक और | another |
| पुनि | अब फिर | now; again |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| जनम | जन्म | birth |
| कर | का | of; for |
| हेतु | कारण | reason |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 152
- स्रोत अभिलेख
- 1.152
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 158, 159
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