बालकाण्ड · दोहा 153 · दोहा/सोरठा
जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।
जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।
प्रजा पाल अति बेदबिधि कतहुँ नहीं अघ लेस।।153।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.153 · पुस्तक पृ. 159, 159
भावार्थ और शब्दार्थ
1जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।
जब प्रतापभानु राजा बने, तब देश में उनके राजाधिकार की दुहाई फैल गई।
English explanation
When Pratapabhanu became king, his sovereign authority was proclaimed throughout the country.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| प्रतापरबि | प्रतापभानु | Pratapabhanu, the elder son |
| भयउ | बने | became |
| नृप | राजा | king |
| फिरी | फैल गई; घोषित हुई | spread; was proclaimed |
| दोहाई | राजाधिकार की दुहाई | proclamation of sovereign authority |
| देस | देश में | throughout the country |
2 प्रजा पाल अति बेदबिधि कतहुँ नहीं अघ लेस।।153।।
वे वेद-विहित विधि के अनुसार प्रजा का बड़ी सावधानी से पालन करते थे; कहीं पाप का लेश भी नहीं था।
English explanation
He cared for his subjects most diligently according to Vedic prescriptions; nowhere was there even a trace of sin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रजा | प्रजा का | his subjects |
| पाल | पालन करते थे | protected and cared for |
| अति | बहुत; अत्यंत | most diligently |
| बेदबिधि | वेद-विहित विधि से | according to Vedic prescriptions |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| नहीं | नहीं था | there was no |
| अघ | पाप का | of sin |
| लेस | लेश; तनिक अंश | even a trace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 153
- स्रोत अभिलेख
- 1.153
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 159, 159
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।