बालकाण्ड · दोहा 154 · दोहा/सोरठा
स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।
स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।
अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु।।154।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.154 · पुस्तक पृ. 160, 160
भावार्थ और शब्दार्थ
1स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।
अपने बाहुबल से विश्व को अपने अधीन करके राजा ने अपने नगर में प्रवेश किया।
English explanation
Having brought the world under his control through the strength of his arms, the king entered his own city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वबस | अपने अधीन | under his own control |
| बिस्व | विश्व को | the world |
| करि | करके | having made |
| बाहुबल | बाहुओं के बल से | by the strength of his arms |
| निज | अपने | his own |
| पुर | नगर में | city |
| कीन्ह | किया | made |
| प्रबेसु | प्रवेश | entry |
2 अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु।।154।।
राजा उचित समय पर अर्थ, धर्म, काम आदि के सुखों का सेवन करता था।
English explanation
The king enjoyed the satisfactions of prosperity, righteous duty, desire, and the like, each at its proper time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरथ | अर्थ—धन और समृद्धि | material prosperity |
| धरम | धर्म—कर्तव्य और सदाचरण | righteous duty and conduct |
| कामादि | काम अर्थात इच्छापूर्ति आदि | fulfillment of desire and the like |
| सुख | सुखों का | the satisfactions of |
| सेवइ | सेवन करता है | enjoys |
| समयँ | उचित समय पर | at the proper time |
| नरेसु | राजा | the king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 154
- स्रोत अभिलेख
- 1.154
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 160, 160
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।