बालकाण्ड · दोहा 155 · दोहा/सोरठा
जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।
जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।
बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग।।155।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.155 · पुस्तक पृ. 160, 161
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।
पुराणों और वेदों में जितने यज्ञ बताए गए हैं, उन सभी में से एक-एक को—
English explanation
Every single sacrifice described in the Puranas and the Vedas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जँह | जहाँ तक; जितने | as far as; as many as |
| लगि | तक | up to |
| कहे | बताए गए | described |
| पुरान | पुराणों में | in the Puranas |
| श्रुति | वेदों में | in the Vedas |
| एक | एक | each |
| एक | एक; प्रत्येक अलग-अलग | single; individually |
| सब | सभी | all |
| जाग | यज्ञ | sacrifices; sacrificial rites |
2 बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग।।155।।
राजा ने प्रेमपूर्वक हजारों-हजार बार किया।
English explanation
The king performed them thousands upon thousands of times, with loving devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | times |
| सहस्त्र | हजार | a thousand |
| सहस्त्र | हजार; हजारों-हजार | a thousand; thousands upon thousands |
| नृप | राजा ने | the king |
| किए | किए; संपन्न किए | performed |
| सहित | के साथ | with |
| अनुराग | प्रेम; अनुराग | love; loving devotion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 155
- स्रोत अभिलेख
- 1.155
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 160, 161
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