बालकाण्ड · दोहा 274 · दोहा/सोरठा
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.274 · पुस्तक पृ. 262, 263
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।
वीर युद्ध में कार्य करके दिखाते हैं; बातों से अपना बड़प्पन नहीं जताते।
English explanation
Heroes demonstrate their deeds in battle; they do not proclaim themselves through words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सूर | शूरवीर | heroes; valiant warriors |
| समर | युद्ध में | in battle |
| करनी | वीरता के कार्य | deeds of valor |
| करहिं | करते हैं | perform |
| कहि | कहकर; बातों से | by speaking; through words |
| न | नहीं | not |
| जनावहिं | जताते हैं; प्रकट करते हैं | proclaim; make known |
| आपु | अपने को; अपना बड़प्पन | themselves; their own greatness |
2 बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।
युद्ध में शत्रु को सामने उपस्थित पाकर कायर अपने प्रताप का बखान करते हैं।
English explanation
When cowards find an enemy present before them in battle, they boast of their prowess.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिद्यमान | सामने उपस्थित | present before them |
| रन | युद्ध में | in battle |
| पाइ | पाकर | on finding |
| रिपु | शत्रु को | an enemy |
| कायर | कायर लोग | cowards |
| कथहिं | बखान करते हैं | boast of; recount |
| प्रतापु | अपना प्रताप; पराक्रम | their own prowess |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 274
- स्रोत अभिलेख
- 1.274
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 262, 263
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।