बालकाण्ड · दोहा 275 · दोहा/सोरठा
गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।
गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।
अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.275 · पुस्तक पृ. 263, 264
भावार्थ और शब्दार्थ
1गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।
गाधि के पुत्र विश्वामित्र मन में हँसकर कहते हैं: मुनि को सब हरा-ही-हरा, अर्थात अनुकूल और आसान, सूझ रहा है।
English explanation
Gadhi’s son Vishvamitra says, laughing inwardly: “The sage sees only green everywhere—he thinks everything is favorable and easy.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गाधिसूनु | गाधि के पुत्र विश्वामित्र | Vishvamitra, son of Gadhi |
| कह | कहते हैं | says |
| हृदयँ | हृदय में | inwardly |
| हँसि | हँसकर | laughing |
| मुनिहि | मुनि परशुराम को | to the sage Parashurama |
| हरिअरइ | हरियाली ही | only greenery |
| सूझ | दिखती है | appears |
2 अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।
यह लोहे का खाँड है, गन्ने का नहीं; यह नासमझ अभी भी नहीं समझता।
English explanation
This is a lump made of iron, not of sugarcane; the uncomprehending sage still does not understand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अयमय | लोहे का बना | made of iron |
| खाँड | खाँड का ढेला | a lump of sugar |
| न | नहीं | not |
| ऊखमय | गन्ने से बना | made from sugarcane |
| अजहुँ | अभी भी | even now |
| न | नहीं | not |
| बूझ | समझता | understands |
| अबूझ | नासमझ | the uncomprehending one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 275
- स्रोत अभिलेख
- 1.275
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 263, 264
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।