बालकाण्ड · दोहा 276 · दोहा/सोरठा
लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।
लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।
बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.276 · पुस्तक पृ. 264, 265
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।
लक्ष्मण का उत्तर आहुति के समान था और परशुराम का क्रोध अग्नि के समान।
English explanation
Lakshmana’s reply was like an offering into the fire, and Parashurama’s anger was that fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण का | Lakshmana’s |
| उतर | उत्तर; प्रत्युत्तर | reply; retort |
| आहुति | अग्नि में दी जाने वाली आहुति | an offering into a sacrificial fire |
| सरिस | के समान | like |
| भृगुबर | परशुराम का | Parashurama’s, of Bhrigu’s lineage |
| कोपु | क्रोध | anger |
| कृसानु | अग्नि | fire |
2 बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।
उस क्रोधाग्नि को बढ़ते देखकर रघुकुल के सूर्य श्रीराम ने जल के समान शीतल वचन बोले।
English explanation
Seeing that fire of anger grow, Rama, the sun of Raghu’s lineage, spoke words cooling like water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बढ़त | बढ़ते हुए | growing |
| देखि | देखकर | seeing |
| जल | पानी | water |
| सम | के समान | like |
| बचन | वचन | words |
| बोले | बोले | spoke |
| रघुकुलभानु | रघुकुल के सूर्य श्रीराम | Rama, the sun of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 276
- स्रोत अभिलेख
- 1.276
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 264, 265
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