बालकाण्ड · दोहा 277 · दोहा/सोरठा
लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।
लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।
जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल।।277।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.277 · पुस्तक पृ. 265, 266
भावार्थ और शब्दार्थ
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1लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।
लक्ष्मण ने हँसकर कहा, 'हे मुनि, सुनिए, क्रोध पाप की जड़ है।'
English explanation
Lakshmana laughed and said, 'Listen, sage: anger is the root of sin.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama's younger brother |
| कहेउ | कहा | said |
| हँसि | हँसकर | laughing |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| मुनि | हे मुनि; परशुराम | O sage, Parashurama |
| क्रोधु | क्रोध | anger |
| पाप | पाप | sin |
| कर | का | of |
| मूल | मूल, जड़ | root |
2 जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल।।277।।
'जिसके वश में होकर लोग अनुचित कार्य करते हैं और संसार के प्रतिकूल आचरण करते हैं।'
English explanation
'Under its sway, people do wrong and act against the world.'
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिसके; क्रोध के | of which, referring to anger |
| बस | वश में | under the sway |
| जन | लोग | people |
| अनुचित | अनुचित कार्य | wrongful deeds |
| करहिं | करते हैं | do |
| चरहिं | आचरण करते हैं | conduct themselves |
| बिस्व | संसार के | to the world |
| प्रतिकूल | विरुद्ध, अहितकर ढंग से | in opposition, harmfully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 277
- स्रोत अभिलेख
- 1.277
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 265, 266
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