बालकाण्ड · दोहा 278 · दोहा/सोरठा
सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।
सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।
गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम।।278।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.278 · पुस्तक पृ. 266, 266
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।
यह सुनकर लक्ष्मण फिर हँसे; राम ने उनकी ओर आँखें तरेरीं।
English explanation
Hearing this, Lakshmana laughed again; Rama gave him a stern look.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing this |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama's younger brother |
| बिहसे | हँसे | laughed |
| बहुरि | फिर | again |
| नयन | आँखें | eyes |
| तरेरे | तरेरीं | cast sternly |
| राम | राम ने | Rama |
2 गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम।।278।।
लक्ष्मण संकोच करके कटु वाणी छोड़कर गुरु विश्वामित्र के पास चले गए।
English explanation
Abashed, Lakshmana stopped his provocative speech and went near his teacher Vishvamitra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु विश्वामित्र के | of the teacher Vishvamitra |
| समीप | पास | near |
| गवने | चले गए | went |
| सकुचि | संकोच करके | feeling abashed |
| परिहरि | छोड़कर | giving up |
| बानी | वाणी | speech |
| बाम | कटु, प्रतिकूल | provocative, antagonistic |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 278
- स्रोत अभिलेख
- 1.278
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 266
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