बालकाण्ड · दोहा 279 · दोहा/सोरठा
गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।
गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।
परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.279 · पुस्तक पृ. 266, 267
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।
मेरे कुठार की भयंकर गति सुनकर राजाओं की स्त्रियों के गर्भ गिर जाते हैं।
English explanation
Hearing of the dreadful action of my axe, kings' wives miscarry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गर्भ | गर्भ | pregnancies; unborn children |
| स्त्रवहिं | गिर जाते हैं | are miscarried |
| अवनिप | राजाओं की | of kings |
| रवनि | स्त्रियाँ; पत्नियाँ | women; wives |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| कुठार | कुल्हाड़े की | of the axe |
| गति | गति; प्रहार का प्रभाव | action; effect of its strokes |
| घोर | भयंकर | dreadful |
2 परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।
फिर भी, परशु के रहते मैं अपने शत्रु इस राजकुमार को जीवित देख रहा हूँ।
English explanation
Yet, with my axe still at hand, I see this enemy prince alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसु | परशु; युद्ध-कुल्हाड़ा | battle-axe |
| अछत | मौजूद रहते | while still present |
| देखउँ | मैं देखता हूँ | I see |
| जिअत | जीवित | alive |
| बैरी | शत्रु | enemy |
| भूपकिसोर | राजकुमार लक्ष्मण | the young prince Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 279
- स्रोत अभिलेख
- 1.279
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 266, 267
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।