बालकाण्ड · दोहा 280 · दोहा/सोरठा
परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।
परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।
संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु।।280।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 267, 268
भावार्थ और शब्दार्थ
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1परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।
तब परशुराम हृदय में अत्यंत क्रोध लेकर राम से बोले।
English explanation
Then Parashurama spoke to Rama, with intense anger in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परसुरामु | परशुराम, फरसाधारी ऋषि | Parashurama, the axe-bearing sage |
| तब | तब | then |
| राम | राम | Rama |
| प्रति | से, की ओर | to |
| बोले | बोले | spoke |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अति | अत्यधिक | intense |
| क्रोधु | क्रोध | anger |
2 संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु।।280।।
अरे मूर्ख, शिव का धनुष तोड़कर तू मुझे समझाने और शांत करने की कोशिश करता है!
English explanation
Fool! Having broken Shiva’s bow, you try to reason with me and calm me down!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभु | शिव का | Shiva’s |
| सरासनु | धनुष | bow |
| तोरि | तोड़कर | having broken |
| सठ | अरे मूर्ख | you fool |
| करसि | तू करता है | you do |
| हमार | मेरा, मुझे | my; of me |
| प्रबोधु | समझाना, शांत करना | reasoning with, pacifying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 280
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 267, 268
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