बालकाण्ड · दोहा 281 · दोहा/सोरठा
प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।
प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।
बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.281 · पुस्तक पृ. 268, 269
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।
स्वामी और सेवक के बीच युद्ध कैसा? हे श्रेष्ठ ब्राह्मण, क्रोध छोड़ दीजिए।
English explanation
How can there be battle between master and servant? O foremost Brahmin, abandon your anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभुहि | स्वामी के लिए | for the master |
| सेवकहि | सेवक के लिए | for the servant |
| समरु | युद्ध | battle |
| कस | कैसा; कैसे उचित | how; how fitting |
| तजहु | छोड़ दीजिए | please abandon |
| बिप्रबर | हे श्रेष्ठ ब्राह्मण | O foremost Brahmin |
| रोसु | क्रोध | anger |
2 बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।
आपका वेश देखकर बालक ने कुछ कह दिया; बालक का भी दोष नहीं है।
English explanation
Seeing your attire, the boy said a few things; the boy, too, is not at fault.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेषु | आपका वेश | your attire |
| बिलोकें | देखकर | on seeing |
| कहेसि | उसने कह दिया | he said |
| कछु | कुछ बातें | a few things |
| बालकहू | बालक का भी | the boy's either |
| नहिं | नहीं | not |
| दोसु | दोष | fault |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 281
- स्रोत अभिलेख
- 1.281
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 268, 269
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