बालकाण्ड · दोहा 140 · दोहा/सोरठा
सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।
सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।
अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 148, 149
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।
देवता, मनुष्य या मुनि—ऐसा कोई नहीं जिसे प्रबल माया मोहित न करती हो।
English explanation
Among gods, humans, and sages, there is no one whom powerful maya does not delude.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहिं | नहीं है | there is none |
| जेहि | जिसे | whom |
| न | नहीं | not |
| मोह | मोहित करती | deludes |
| माया | माया; मोहकारी शक्ति | maya; the power of delusion |
| प्रबल | प्रबल; शक्तिशाली | powerful |
2 अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।
मन में ऐसा विचार करके महामाया के स्वामी का भजन करना चाहिए।
English explanation
Reflecting thus in the mind, one should worship the Lord of the great power of maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; in this way |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| मन | मन | the mind |
| माहिं | में | in |
| भजिअ | भजन करना चाहिए | one should worship |
| महामाया | महामाया के; महान मायाशक्ति के | of the great power of maya |
| पतिहि | स्वामी को; यहाँ भगवान को | the Lord; here, God as maya’s master |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 140
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 148, 149
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।