बालकाण्ड · दोहा 141 · दोहा/सोरठा
सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।
सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।
राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ।।141।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.141 · पुस्तक पृ. 149, 150
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।
वह सब मैं तुमसे कहता हूँ; हे मुनिश्रेष्ठ, मन लगाकर सुनो।
English explanation
I shall tell you all of it; O foremost sage, listen attentively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| मैं | मैं | I |
| तुम्ह | तुम | you |
| सन | से | to |
| कहउँ | कहता हूँ | tell |
| सबु | सब | all |
| सुनु | सुनो | listen |
| मुनीस | हे मुनिश्रेष्ठ भरद्वाज | O foremost sage Bharadvaja |
| मन | मन; ध्यान | mind; attention |
| लाई | लगाकर | applying; focusing |
2 राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ।।141।।
राम की कथा कलियुग के मल को हरने वाली, मंगल करने वाली और मनोहर है।
English explanation
The story of Rama removes the impurities of the age of Kali, brings auspiciousness, and is delightful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| कलि | कलियुग का | of the age of Kali |
| मल | मल; पापरूपी अशुद्धि | impurity; sinful taint |
| हरनि | हरने वाली | removing |
| मंगल | मंगल; कल्याण | auspiciousness; well-being |
| करनि | करने वाली | bringing about |
| सुहाइ | सुहावनी; मनोहर | delightful; charming |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 141
- स्रोत अभिलेख
- 1.141
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 149, 150
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