बालकाण्ड · दोहा 139 · दोहा/सोरठा
एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।
एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।
सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार।।139।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.139 · पुस्तक पृ. 147, 148
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।
एक कल्प में इसी कारण प्रभु ने मानव अवतार लिया।
English explanation
In one cosmic age, the Lord took human incarnation for this reason.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| कलप | कल्प; सृष्टि का दीर्घ काल | cosmic age |
| एहि | इसी | this very |
| हेतु | कारण से | for this reason |
| प्रभु | प्रभु; भगवान | the Lord |
| लीन्ह | लिया | took |
| मनुज | मानव | human |
| अवतार | अवतार | incarnation |
2 सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार।।139।।
हरि देवताओं को प्रसन्न करने वाले, सज्जनों को सुख देने वाले और पृथ्वी का भार दूर करने वाले हैं।
English explanation
Hari delights the gods, brings happiness to the virtuous, and removes the earth’s burden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं को | the gods |
| रंजन | प्रसन्न करने वाले | delighting |
| सज्जन | सज्जनों को | the virtuous |
| सुखद | सुख देने वाले | bringing happiness |
| हरि | हरि; भगवान विष्णु | Hari, Lord Vishnu |
| भंजन | दूर करने वाले | removing |
| भुबि | पृथ्वी का | of the earth |
| भार | भार; बोझ | burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 139
- स्रोत अभिलेख
- 1.139
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 148
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