बालकाण्ड · दोहा 229 · दोहा/सोरठा
सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।
सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।
चकित बिलोकति सकल दिसि जनु सिसु मृगी सभीत।।229।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.229 · पुस्तक पृ. 224, 225
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।
सीता ने नारद के वचन स्मरण किए, और उनके हृदय में पवित्र प्रेम उत्पन्न हुआ।
English explanation
Sita recalled Narada’s words, and pure love arose in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | recalling |
| सीय | सीता | Sita |
| नारद | देवर्षि नारद के | of the divine sage Narada |
| बचन | वचन | words |
| उपजी | उत्पन्न हुआ | arose |
| प्रीति | प्रेम | love |
| पुनीत | पवित्र | pure |
2 चकित बिलोकति सकल दिसि जनु सिसु मृगी सभीत।।229।।
सीता चकित होकर सभी दिशाओं में देख रही हैं, मानो भयभीत हिरनी की बच्ची हों।
English explanation
Sita looks about in every direction with startled wonder, like a frightened young doe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चकित | चकित होकर | with startled wonder |
| बिलोकति | देखती हैं | looks |
| सकल | सभी | every |
| दिसि | दिशाओं में | in direction |
| जनु | मानो | as though |
| सिसु | नन्ही | young |
| मृगी | हिरनी | doe |
| सभीत | भयभीत | frightened |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 229
- स्रोत अभिलेख
- 1.229
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 224, 225
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