बालकाण्ड · दोहा 228 · दोहा/सोरठा
तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।
तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।
कहु कारनु निज हरष कर पूछहि सब मृदु बैन।।228।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.228 · पुस्तक पृ. 223, 224
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।
सखियों ने उसकी दशा देखी—शरीर रोमांचित था और आँखों में आँसू थे।
English explanation
The companions saw her state: her body thrilled with goosebumps and her eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस सखी की | that companion’s |
| दसा | दशा | condition |
| देखि | देखकर | seeing |
| सखिन्ह | सखियों ने | the companions |
| पुलक | रोमांच | goosebumps |
| गात | शरीर में | on her body |
| जलु | आँसू | tears |
| नैन | आँखों में | in her eyes |
2 कहु कारनु निज हरष कर पूछहि सब मृदु बैन।।228।।
सब सखियाँ कोमल वचनों में पूछने लगीं, ‘अपने आनंद का कारण बताओ।’
English explanation
All the companions asked gently, ‘Tell us the reason for your joy.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | बताओ | tell us |
| कारनु | कारण | the reason |
| निज | अपने | your own |
| हरष | आनंद | joy |
| कर | का | of |
| पूछहि | पूछती हैं | ask |
| सब | सभी सखियाँ | all the companions |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बैन | वचनों में | in words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 228
- स्रोत अभिलेख
- 1.228
- सहायक विषय
- पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजीका प्रथम दर्शन, श्रीसीतारामजीका परस्पर दर्शन
- मुद्रित पृष्ठ
- 223, 224
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