बालकाण्ड · दोहा 212 · दोहा/सोरठा
सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।
सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।
फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास।।212।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.212 · पुस्तक पृ. 210, 211
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।
फूलों की वाटिकाएँ, बाग और वन थे, जो बहुत-से पक्षियों के निवास थे।
English explanation
There were flower gardens, orchards, and groves, serving as homes to many birds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | फूलों की | flower |
| बाटिका | वाटिकाएँ | gardens |
| बाग | बाग | orchards |
| बन | वन | groves |
| बिपुल | बहुत-से | numerous |
| बिहंग | पक्षियों के | of birds |
| निवास | निवास-स्थान | homes |
2 फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास।।212।।
वे फूलते, फलते और सुंदर नए पत्तों से भरकर नगर के चारों ओर शोभा पा रहे थे।
English explanation
Blooming, bearing fruit, and covered with lovely new foliage, they adorned all sides of the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलत | फूलते हुए | blooming |
| फलत | फलते हुए | bearing fruit |
| सुपल्लवत | सुंदर नए पत्तों से युक्त | covered with lovely new foliage |
| सोहत | शोभा पा रहे थे | looked beautiful |
| पुर | नगर के | of the city |
| चहुँ | चारों | all four |
| पास | ओर | sides |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 212
- स्रोत अभिलेख
- 1.212
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 210, 211
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