बालकाण्ड · दोहा 211 · दोहा
अस प्रभु दीनबंधु हरि कारन रहित दयाल।
अस प्रभु दीनबंधु हरि कारन रहित दयाल।
तुलसिदास सठ तेहि भजु छाड़ि कपट जंजाल॥ २११॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.211 · पुस्तक पृ. 209, 210
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अस प्रभु दीनबंधु हरि कारन रहित दयाल।
ऐसे प्रभु हरि दीनों के बंधु हैं और बिना किसी कारण या अपेक्षा के दयालु हैं।
English explanation
Such is Lord Hari: a friend of the helpless, compassionate without any cause or expectation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसे | such |
| प्रभु | स्वामी; भगवान | the Lord |
| दीनबंधु | दीनों और असहायों के बंधु | friend of the poor and helpless |
| हरि | भगवान हरि, यहाँ राम | Lord Hari, here Rama |
| कारन | कारण; हेतु | cause; motive |
| रहित | से रहित; बिना | without; free from |
| दयाल | दयालु | compassionate |
2तुलसिदास सठ तेहि भजु छाड़ि कपट जंजाल॥ २११॥
हे मूर्ख तुलसीदास, कपट का जंजाल छोड़कर उन्हीं प्रभु का भजन कर।
English explanation
O foolish Tulsidas, abandon the entanglement of deceit and worship that very Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसिदास | हे तुलसीदास, कवि का स्वयं को संबोधन | O Tulsidas, the poet addressing himself |
| सठ | हे मूर्ख | O foolish one |
| तेहि | उन्हीं प्रभु को | that very Lord |
| भजु | भजन कर; आराधना कर | worship; devote yourself to |
| छाड़ि | छोड़कर | having abandoned |
| कपट | छल; धोखा | deceit; hypocrisy |
| जंजाल | उलझन; बंधनकारी जाल | entanglement; ensnaring web |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 211
- स्रोत अभिलेख
- 1.211
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 209, 210
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