बालकाण्ड · दोहा 210 · दोहा/सोरठा
गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।
गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।
चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.21 · पुस्तक पृ. 208, 209
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।
गौतम की पत्नी अहल्या शाप के वश पत्थर की देह धारण किए धैर्यपूर्वक आपके चरणकमलों की धूल चाहती हैं।
English explanation
Gautama’s wife Ahalya, bearing a stone body under a curse, patiently longs for the dust of your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गौतम | ऋषि गौतम की | of the sage Gautama |
| नारि | पत्नी अहल्या | wife Ahalya |
| श्राप | शाप के | of a curse |
| बस | वश में | under the power |
| उपल | पत्थर की | of stone |
| देह | देह | body |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| धीर | धैर्यपूर्वक | patiently |
2 चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।
वे आपके चरणकमलों की धूल चाहती हैं; हे रघुवीर, उन पर कृपा कीजिए।
English explanation
She longs for the dust of your lotus feet; O Rama, hero of Raghu’s lineage, show her grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरन | आपके चरण | your feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| रज | धूल | dust |
| चाहति | चाहती हैं | she longs for |
| कृपा | कृपा | grace |
| करहु | कीजिए | please bestow |
| रघुबीर | हे रघुवंश के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 210
- स्रोत अभिलेख
- 1.21
- सहायक विषय
- विश्वामित्र-यज्ञकी रक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 208, 209
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