बालकाण्ड · दोहा 209 · दोहा/सोरठा
आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।
आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।
कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि।।209।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.209 · पुस्तक पृ. 207, 208
भावार्थ और शब्दार्थ
1आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।
संभावित पाठार्थ: सब आयुध समर्पित करके मुनि प्रभु को अपने आश्रम ले आए। दिए हुए ‘आयुष’ के कारण पहला पद संदिग्ध है।
English explanation
Probable intended sense: Having offered all the weapons, the sage brought the Lord to his own hermitage. The supplied ‘आयुष’ makes the opening word uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयुष | आयुध; अस्त्र-शस्त्र। | Weapons; arms. |
| सब | सब | all |
| समर्पि | समर्पित | offered |
| कै | करके | having done |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| निज | अपने | his own |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitage |
| आनि | लाकर | having brought |
2 कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि।।209।।
मुनि ने प्रभु को भक्तिपूर्ण प्रेम का आदर करने वाला जानकर कंद, मूल और फल का भोजन दिया।
English explanation
Knowing the Lord to cherish devotional love, the sage offered him a meal of tubers, roots, and fruit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंद | कंद | tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruit |
| भोजन | भोजन | a meal |
| दीन्ह | दिया | offered |
| भगति | भक्ति | devotion |
| हित | प्रेम करने वाला; हितकारी | one who cherishes; favorable to |
| जानि | जानकर | knowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 209
- स्रोत अभिलेख
- 1.209
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 207, 208
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।