बालकाण्ड · दोहा 208 (ख) · दोहा/सोरठा
पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।
पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।
कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन।।208(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.208 · पुस्तक पृ. 206, 207
भावार्थ और शब्दार्थ
1 पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।
मनुष्यों में सिंह के समान दोनों वीर मुनि का भय दूर करने के लिए प्रसन्न होकर चले।
English explanation
The two heroes, lions among men, set out joyfully to remove the sage's fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरुषसिंह | मनुष्यों में सिंह के समान | lions among men |
| दोउ | दोनों | both |
| बीर | वीर | heroes |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चले | चले | set out |
| मुनि | मुनि का | the sage's |
| भय | भय | fear |
| हरन | दूर करने के लिए | to dispel |
2 कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन।।208(ख)।।
वे कृपा के समुद्र, स्थिर बुद्धि वाले और समस्त विश्व के कारणों के भी कारण हैं।
English explanation
They are oceans of compassion, steadfast in understanding, and the cause of the causes of the entire universe.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपासिंधु | कृपा के समुद्र | oceans of compassion |
| मतिधीर | स्थिर बुद्धि वाले | steadfast in understanding |
| अखिल | समस्त | entire |
| बिस्व | विश्व के | of the universe |
| कारन | कारणों के | of the causes |
| करन | कारण | the cause |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 208 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.208
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 206, 207
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।