बालकाण्ड · दोहा 208 (क) · दोहा/सोरठा
सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।
सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।
जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।।208(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.208 · पुस्तक पृ. 206, 207
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।
राजा ने अनेक प्रकार से आशीर्वाद देकर पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र को सौंप दिया।
English explanation
After blessing them in many ways, the king entrusted his sons to sage Vishvamitra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौंपे | सौंप दिए | entrusted |
| भूप | राजा ने | the king |
| रिषिहि | ऋषि को | to the sage |
| सुत | पुत्रों को | his sons |
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| देइ | देकर | having given |
| असीस | आशीर्वाद | blessings |
2 जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।।208(क)।।
प्रभु माताओं के भवन गए और उनके चरणों में सिर झुकाकर चल पड़े।
English explanation
The Lords went to their mothers' quarters and, bowing their heads at their feet, departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननी | माताओं के | of their mothers |
| भवन | भवन में | to the quarters |
| गए | गए | went |
| प्रभु | प्रभु राम और लक्ष्मण | the Lords, Rama and Lakshmana |
| चले | चल पड़े | departed |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| पद | चरणों में | at their feet |
| सीस | सिर | heads |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 208 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 1.208
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 206, 207
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