बालकाण्ड · दोहा 207 · दोहा/सोरठा
देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।
देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।
धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान।।207।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.207 · पुस्तक पृ. 205, 206
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।
‘हे राजा, प्रसन्न मन से उन्हें दीजिए; मोह और अज्ञान छोड़ दीजिए।’
English explanation
‘O king, give them with a glad heart; abandon attachment and ignorance.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहु | उन्हें दीजिए | give them |
| भूप | हे राजा | O king |
| मन | मन से | with a heart |
| हरषित | प्रसन्न | glad |
| तजहु | छोड़ दीजिए | abandon |
| मोह | मोह | attachment |
| अग्यान | अज्ञान | ignorance |
2 धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान।।207।।
‘हे स्वामी, इससे आपको धर्म और उत्तम यश मिलेगा तथा इन दोनों का अत्यंत कल्याण होगा।’
English explanation
‘My lord, this will bring you religious merit and good renown, and bring great welfare to these two.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्म | धर्म का लाभ | religious merit |
| सुजस | उत्तम यश | good renown |
| प्रभु | हे स्वामी | my lord |
| तुम्ह | आप | you |
| कौं | को | to |
| इन्ह | इन दोनों को | these two, Rama and Lakshmana |
| कहँ | के लिए | for |
| अति | बहुत | great |
| कल्यान | कल्याण | welfare |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 207
- स्रोत अभिलेख
- 1.207
- सहायक विषय
- विश्वामित्रका राजा दशरथसे राम-लक्ष्मणको माँगना
- मुद्रित पृष्ठ
- 205, 206
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