बालकाण्ड · दोहा 206 · दोहा/सोरठा
बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।
बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।
करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार।।206।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.206 · पुस्तक पृ. 204, 205
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।
अनेक प्रकार के मनोरथ करते हुए जाते समय उन्हें देर नहीं लगी।
English explanation
Entertaining many hopes as he journeyed, he took little time to arrive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| करत | करते हुए | entertaining; forming |
| मनोरथ | मन की अभिलाषाएँ | hopes; cherished wishes |
| जात | जाते हुए; जाने में | while going; in the journey |
| लागि | लगी | was taken |
| नहिं | नहीं | not |
| बार | देर | delay; long time |
2 करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार।।206।।
सरयू के जल में स्नान करके वे राजा दशरथ के दरबार में गए।
English explanation
After bathing in the waters of the Sarayu, he went to King Dasharatha's court.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| सरऊ | सरयू नदी के | of the Sarayu River |
| जल | जल में | in the waters |
| गए | गए | went |
| भूप | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| दरबार | दरबार में | to the court |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 206
- स्रोत अभिलेख
- 1.206
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 204, 205
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