बालकाण्ड · दोहा 205 · दोहा/सोरठा
ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।
ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।
भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप।।205।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.205 · पुस्तक पृ. 203, 204
भावार्थ और शब्दार्थ
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1ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।
जो सर्वव्यापक, अविभाज्य, इच्छारहित, अजन्मा और निर्गुण हैं, जिनका न नाम है न रूप—
English explanation
He who is all-pervading, indivisible, desireless, unborn, and beyond qualities, with neither name nor form—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापक | सर्वव्यापक | all-pervading |
| अकल | अविभाज्य, अंशरहित | indivisible, without parts |
| अनीह | इच्छा या चेष्टा से रहित | without desire or striving |
| अज | अजन्मा | unborn |
| निर्गुन | गुणों से परे | beyond qualities |
| नाम | नाम | name |
| न | नहीं | neither |
| रूप | रूप | form |
2 भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप।।205।।
वे भक्तों के लिए अनेक प्रकार के अनुपम चरित्र करते हैं।
English explanation
For the sake of devotees, he performs incomparable deeds in many different ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगत | भक्तों के | devotees |
| हेतु | लिए | for the sake of |
| नाना | अनेक | many different |
| बिधि | प्रकार से | ways |
| करत | करते हैं | performs |
| चरित्र | चरित्र या लीला-कर्म | deeds |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 205
- स्रोत अभिलेख
- 1.205
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 204
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