बालकाण्ड · दोहा 204 · दोहा/सोरठा
कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।
कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।
प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल।।204।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.204 · पुस्तक पृ. 203, 203
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।
कोसलपुर अर्थात् अयोध्या के निवासी—पुरुष, स्त्रियाँ, वृद्ध और बालक—
English explanation
The inhabitants of Kosalpur, that is, Ayodhya—men, women, the elderly, and children—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोसलपुर | कोसल की नगरी अयोध्या | Ayodhya, the city of Kosala |
| बासी | निवासी | inhabitants |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| बृद्ध | वृद्ध | the elderly |
| अरु | और | and |
| बाल | बालक | children |
2 प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल।।204।।
उन सभी को कृपालु राम अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय लगते हैं।
English explanation
To all of them, compassionate Rama is dearer even than their own lives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रानहु | प्राणों से भी | even their own lives |
| ते | से, की अपेक्षा | than |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| लागत | लगते हैं | seem; are felt to be |
| सब | सभी | everyone |
| कहुँ | को | to |
| राम | भगवान राम | Rama |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 204
- स्रोत अभिलेख
- 1.204
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 203
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