बालकाण्ड · दोहा 203 · दोहा/सोरठा
भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।
भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।
भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ।।203।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.203 · पुस्तक पृ. 202, 202
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।
भोजन करते हुए उनका चंचल मन इधर-उधर लगा रहता है; अवसर पाते ही—
English explanation
While eating, his restless attention wanders here and there; finding an opportunity—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भोजन | भोजन | a meal |
| करत | करते हुए | while eating |
| चपल | चंचल | restless |
| चित | मन | mind or attention |
| इत | इधर | here |
| उत | उधर | there |
| अवसरु | मौका | an opportunity |
| पाइ | पाकर | having found |
2 भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ।।203।।
वे किलकारियाँ भरते हुए भाग चले, मुख पर दही और भात लिपटा हुआ था।
English explanation
He ran off with delighted squeals, curd and cooked rice smeared on his mouth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाजि | भागकर | running away |
| चले | चल दिए | went off |
| किलकत | किलकारियाँ भरते हुए | squealing with delight |
| मुख | मुख पर | on his mouth |
| दधि | दही | curd |
| ओदन | पका हुआ चावल, भात | cooked rice |
| लपटाइ | लिपटा हुआ | smeared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 203
- स्रोत अभिलेख
- 1.203
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 202, 202
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।