बालकाण्ड · दोहा 202 · दोहा/सोरठा
बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।
बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।
अब जनि कबहूँ ब्यापै प्रभु मोहि माया तोरि।। 202।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.202 · पुस्तक पृ. 201, 202
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।
कौसल्या हाथ जोड़कर बार-बार विनती करती हैं।
English explanation
Kaushalya repeatedly makes a humble plea with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर-फिर | after time; repeatedly |
| कौसल्या | राम की माता कौसल्या | Kaushalya, Rama’s mother |
| बिनय | विनती | humble plea |
| करइ | करती हैं | makes |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having folded |
2 अब जनि कबहूँ ब्यापै प्रभु मोहि माया तोरि।। 202।।
‘हे प्रभु, अब आपकी माया मुझे कभी न घेरे।’
English explanation
‘Lord, may your Maya never again envelop me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब; अब से | now; from now on |
| जनि | न; ऐसा न हो | may not |
| कबहूँ | कभी भी | ever |
| ब्यापै | व्याप्त करे; अपने प्रभाव में ले | envelop; bring under its influence |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| मोहि | मुझे | me |
| माया | माया; मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | Maya, the power of illusion |
| तोरि | आपकी | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 202
- स्रोत अभिलेख
- 1.202
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 201, 202
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।